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जाने! क्या है योग…?

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By,Parag Gupta, Delhi

आज 21 इंटरनेशनल योग दिवस है। दुनिया के हर कोने में योग किया जा रहा है। तो आज योग दिवस के मौके पर हम आपको बताएंगे कि योग है क्या ..? योग को धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे एक सीधा सा प्रायोगिक विज्ञान माना जाता है, जो जीवन को जीने की कला सिखाता है। योग को एक पूर्ण चिकित्सा पद्धति के रूप में देखा गया है। कहा जाता है कि योग व्यक्ति को सभी धर्म के खूंटो से मुक्त कर जीवन की सरल राह दिखता है। जिस तरह से पर्वतो में हिमालय श्रेष्ठ है उसी प्रकार समस्त दर्शनों, विधियों, नीतियों, नियमों, धर्मो और व्यवस्थाओं में योग श्रेष्ठ है।

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योग संस्कृत धातु ‘युज’ से निकला एक ऐसा शब्द है जिसका मतलब व्यक्तिगत चेतना या सार्वभौमिक चेतना यानि रूह से मिलन है। योग भारतीय ज्ञान की पांच हजार साल पुरानी शैली है हालांकि कई लोग योग को सिर्फ शारीरिक व्यायाम ही मानते हैं। लेकिन योग सिर्फ व्यायाम और आसन नहीं है। बल्कि ये भावनात्मक एकीकरण और रहस्यवादी तत्व की आध्यात्मिक ऊंचाई है, जो आपकी शख्सियत को कल्पनाओं से परे की एक अलग छवि प्रदान करती है।

योग शब्द के दो अर्थ होते हैं-

जोड़

समाधि

जब तक व्यक्ति स्वयं से नहीं जुड़ सकता तबतक वो समाधि तक नही पहुँच सकता. इसके अलावा योग को 4 भागो में बांटा जाता है-

योग के चार भाग-

ज्ञानयोग

भक्तियोग

धर्मयोग

कर्मयोग

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योग की एक खास बात ये भी है कि ये न तो विश्वास करना सिखाता है और न ही संदेह। साथ ही इन दोनों के बीच की अवस्था के तो योग बहुत ज्यादा खिलाफ है। योग के अनुसार अगर आप में जानने की क्षमता है तो आप इसका उपयोग करें। अगर आपको लगता है कि आप अपनी आदतों को छोड़ नहीं पा रहे हैं तो आप उससे परेशान न होकर अपनी आदतो में योग को भी शामिल कर लें। न चाहते हुए भी आपको इसके लाभदायक परिणाम जरूर मिलेंगे।

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