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सुनहरे चांद की रात करवा चौथ

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लाल रंग की चुनर , प्रीत के रंग की ओढनी, चांद-सिंतारो से सजी रात , चांद का सुनहरा रंग, ये सब एक सुहागन के सुहाग के उस लाल रंग की ताकत को दर्शाता है। जिस दिन सभी सुहागन औरते, निर्जल रहकर , अपने सुहाग की दीर्घायु की कामना करती है, उस सुनहरे चांद की रात को ‘‘करवा चौथ‘‘ कहते है ।

यह व्रत कार्तिक माह की चतुर्थी को मनाया जाता है, इसलिए इसे करवा चौथ कहते हैं। य़ू तो करवाचौथ की बहुत सी पौराणिक कथा है पर इस व्रत की शुरुआत सावित्री ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाकर की थी। तभी से सभी सुहागिनें अन्न जल त्यागकर अपने पति के लम्बी उम्र के लिए इस व्रत को श्रद्धा के साथ करती हैं।

भारतीय महिलाओं के जीवन में करवा चैथ का त्यौहार सबसे अहम होता है.। इस त्यौहार के आने से कुछ हफ्ते पहले ही इसकी रौनक से सारा बाजार एक नई नवली दुल्हन की तरह सज जाता है। प्रीत के रंग और सजना के संग से बना ये करवाचैथ। सभी सुहमगिन स्त्रियों के लिए एक महŸवपूर्ण दिन होता है। इस दिन सभी सुहागन महिलाएं लाल रंग के वस्त्र और सभी सुहाग के चीजों से अपने आप को अपने मीत के नाम से सजाती है और सज धज के दुल्हन की तरह तैयार होती है।

सम्र्पण ,प्यार ,खुशी से बना ये त्यौहार एक स्त्री के जीवन को रंगो की बौछारओं से भर देता है। करवा चैथ का त्यौहार एक सुहागन के जीवन में हजारों खुशियां लेकर आता है। हर सुहगिन के सदा सुहागन रहने के अरमान को आज का ये खास दिन पूर्ति कराता है। इस दिन सभी सुहागन ईश्वर से देवो के देव महादेव और देवी पार्वती की तरह जोडी बनने की कामना करती है।

Happy Karwachauth!!

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