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जाने चुड़ा क्यों पहनते हैं..

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भारतीय संस्कृति में चूडियों की काफी अच्छी प्रथा हैं..हाथों में पहनी हुई हरी-लाल चुडियां हाथों की खुबसुरती को निखार देती हैं..और चुडियां पहनना काफी शुभ भी माना जाता है.. और आजकल रंग- बिरंगी चूडिय़ों के साथ साथ लोग चुड़ा पहनना काफी ज्यादा पंसद कर रहे हैं..वेसे तो चुड़ो का प्रचलन पंजाबीयों में होता हैं पर आजकल चूड़ा पहनने का चलन इतना अधिक हो गया है कि अब भारत के हर कोने में लड़कियां अपने विवाह के अवसर पर चूड़ा ही पहनना पंसद करती हैं…तो चलिए आपको बताते है इससे जुड़े रस्मो रिवाज के बारे में..

दुल्हनें के लिए चूड़े का महत्व सबसे अधिक होता है..पंजाबियों में शादी के दिन चूड़ा पहनने को लेकर सेरेमनी भी होती है…दुल्हन के मामा, दुल्हन के लिये चूड़ा लेकर आते हैं..जिसमें लाल और सफेद रंगों की 21 चूडियां होती हैं..

दुल्हन चूड़े को तब तक नहीं देख पाती है जब तक की वह पूरी तरह से तैयार ना हो जाए और मंडप पर दूल्हे के साथ ना बैठ जाए…

चूड़ा पंजाबी रिवाज के हिसाब से दुल्हन को लगभग 1 साल तक पहनना होता है..यह पति की भलाई के लिए भी पहना जाता है

दुल्हन को चूड़ा शादी के मंडप में उसके मामा देते हैं उस दौरान दुल्हन की आंखें उसकी मां बंद कर देती हैं, जिससे वह चूड़े को ना देख पाएं नहीं तो खुद उसी की नजर उस चूड़े पर लग जाएगी..

चूड़े को शादी की एक रात पहले दूध में भिगोकर रखा जाता है..चूड़े को किसी नदी के पास उतारा जाता है और छोटी सी पूजा के बाद नदी में उसे बहा दिया जाता है..

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